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Politics

Trump turning down R-Day invite purely scheduling issue: US envoy

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So, the question is why Trump declined India’s offer?

United States Ambassador to India Kenneth Juster on Thursday said President Donald Trump’s inability to participate as the chief guest at India’s Republic Day celebrations next year was a ‘purely scheduling issue’.

Trump has declined India’s invitation to be the chief guest at the parade citing pressing engagements, including his State of The Union address, around the time India will celebrate its Republic Day on January 26.

Asked if Trump declining India’s invitation had something to do with India signing a deal with Russia on S-400 missile defence systems, Juster, speaking to reporters on the sidelines of an event in New Delhi, said, “No, that is a purely scheduling issue.”

Earlier this week, a White House spokesperson, when asked about Trump’s decision, had said, “President Trump was honoured by Prime Minister Modi’s invitation to him to be the chief guest of India’s Republic Day on January 26, 2019, but is unable to participate due to scheduling constraints.”

Prime Minister Narendra Modi had invited Trump for a visit to India during their talks in Washington in June, 2017.

Every year, India invites world leaders to attend its Republic Day celebrations.

In 2015, the then US president Barack Obama had attended it as the chief guest, which was his second visit to India as the American president.

On whether India will get a waiver from the US on Chabahar amid sanctions on Iran, Juster said, “These are matters that our two governments are discussing and we are working together on that.”

People & Interviews

Can Congress win the 2018 Rajasthan Assembly elections, or will it be the BJP again?

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RAJASTHANI people are smartest one, in context of giving political power. They never allow any ruling party to have full power and hold. There is history of choosing alternating parties. This is the reason why no party claims Rajasthan as their main state. Ahead of Rajasthan Assembly Elections, this is our Ground Report.

In 2013 Assembly Elections and 2014 Lok Sabha Elections BJP came this time there is good chance of congress. However people are happy with government’s development work.

These are some of the points which causes win of BJP as shared by a people of Rajasthan to our team on Ground.

  1. BJP(NDA) Has Very Unique Marketing Strategy.(PM as well)
  2. All of the Cabinet Ministers are socially active which leads it to Target youth.
  3. Also having very good involvement of trending matter whereas opponent used to run-away from situation (nothing to brag about here)
  4. Already we’ve seen so many big marginal victories in many big states.
  5. After urban areas it now covering all the rural areas now!
  6. As numbers of voters are increasing day by day we can conclude that people are getting aware and started taking interest in polity.

Our Team had a conversation with number of people on Ground. What TUP has learned here is that there are some initiatives which BJP has under its belt to show off. Like Bhamashah Health Insurance, Digitization of services, Sampark Portal, Water conservation schemes, Scholarship of General Category students and few more.

  • Rajasthan is a unique state where power is alternating between Congress and BJP. In 2013 Ashok Ghelot, lost the election even though he had some creditable performance in some sectors. But his complete neglect of infrastructure cost him his election. Also struggles within the party made his cause difficult.
  • Vasundara Raje has been successful in giving highest importance to development of the state. She is able to bring the state on the road of development. In Skill Development Rajasthan stands first on all India level. While in investment Rajasthan is third as per RBI. As per World Bank Rajasthan is sixth in ease of doing business. In Solar Energy development Rajasthan stands first. Also stands first nationally in building toilets under Swatch Bharath Abhyan. All these achievements are only the beginning of a change in development witnessed in the state. The present BJP government is riding high on its development or Vikas.
  • Unlike in 2013, in 2018 assembly election, a new issue having very wide ramifications has cropped up under the film Padmavati. The dream scene, the dance of Padmavati, the sequence of seeing the reflection of princess Padmavati through the mirror when no mirror was invented at that time, became contentious issues which Rajputs under Karni Sena, are against. This has given a handle to the BJP, government. How far this will affect the election or help BJP is a moot question.
  • Unlike Ashok Ghelot and Sachin Pilot who had to face internal sabotage, Vasundara do not have such problems. Secondly BJP is endowed with a Charismatic leader under Modi, whose presence itself makes a lot of difference. Thirdly there is no corruption case against Vasundara or her ministry. Fourthly the government is focused on development and they are visible. Finally BJP has a strong organization unlike Congress. Hence the contest will be close and unpredictable as of now.

 

This is a Public Opinion which TUP has got on ground covering Rajasthan Elections 2018 closely. Everyday there can be a new story a change but till now this is the situation and facts we gathered. Let’s see who will win Rajasthan Elections 2018 – BJP or Congress.

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Politics

द यूनिवर्सल पोस्ट को राजस्थान चुनाव के चलते मिला एक बेनामी पत्र – क्या आक्रोश है राजस्थान की जनता में?

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भारत की राजनीत में फिर से वो एहम दौर आ चूका है जिस दौर की तैयारी भारतीय राजनीती के  ठेकेदार सालो से करते हैं। टीवी चैनल्स को भी अपने हर घंटे  ब्रेकिंग न्यूज़ की कमी की आपूर्ति होती रहती है। और जनता अक्सर सालो के विकास और तरक्की को भुल जाति और धर्म सम्प्रदाय जैसे मुद्दों से प्रभवित होकर अपने कर्ता धर्ता को चुन लेती है। जो शायद उसने विकास पर नहीं उनके विकास पर नहीं बल्कि उनकी सोच और विचारो पर खरा उतरता है।
वैसे हर बार की तरह इस बार भी कुछ नया नहीं है।  कुछ विकास हुआ कुछ विकार हुआ। जो विकास हुआ उसको जनता के समक्ष रखने की जिम्मेदारी सत्ता दल की है और जो विकार हुआ, उसका खुलासा करने का विरोधी दाल की। खैर फैसला जनता को ही लेना है लेकन जनता की हालत भी उस तोते जैसी है जिसने रट रखा है कि शिकारी आएगा दाना डालेगा लेकिन फसना मत ,लेकिन हर बार की तरह इस बार भी हम फंस तो जायेंगे ही क्योकि जाति ,धर्म और सम्प्रदाय का मुद्दा है ही इतना स्वादिष्ट।
2019 में लोक सभा चुनाव होने है साथ ही नवंबर और दिसम्बर 2018 में भारत के तीन अहम राज्य छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधान सभा चुनाव होने है क्योकि मैं राजस्थान के अलवर जिले के शहरी विधान सभा क्षेत्र का निवासी हूँ इसलिए मैंने निर्णय लिया की मैं अपने क्षेत्र के चुनावी समीकरण को ही समझ पाऊ तो मेरे लिए फायदेमंद भी होगा और उचित भी। अलवर शहरी क्षेत्र से बीजेपी की तरफ से संजय शर्मा प्रत्यासी है और कांग्रेस की तरफ से स्वेता सैनी। गौर करने वाली बात यह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों को अपने इन उम्मेदरो का चुनाव करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और अंततः  पार्टियों ने अपने उम्मीवारों का चुनाव तो कर लिया लेकिन अब देखना यह है कि जनता अपने प्रतिनिधि का चुनाव कैसे और किन मुद्दों से प्रभवित हो कर करती है।
चुनवी रण क्षेत्र में उतरने से पहले यह दोनों प्रत्यासी ईश्वर के आर्शीवाद को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते हैं जितना की जनता के आर्शीवाद को इसीलिए ज्योही कांग्रेस प्रत्यासी तीन मंदिरों  के दर्शन करते हुई परचा भरने पहुँची वैसे ही बीजेपी प्रत्यासी अपने आप को अव्वल साबित करते हुई चार मंदिरो का दर्शन करते हुए परचा भरने पहुंचे। अलवर शहरी विधानसभा क्षेत्र में हिन्दुओ की जनसंख्या 90 फीसदी से ज्यादा है वहीं मुस्लिम जनसंख्या मात्र 4 फीसदी के करीब है। कभी किसी दौर में कांग्रेस मुस्लिम समर्थक पार्टी हुआ करती थी लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के ऐतहासिक जीत के फॉर्मूले ने कही न कही कांग्रेस को भी इस फॉर्मूले को अपनाने में मजबूर कर दिया है। अब तो चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस फार्मूला एक ही है लेकिन जातिवाद की राजनीती करने का आरोप तो दोनो ही एक दूसरे पर लगते रहेंगे।
– Anonymous Letter by a Citizen of Rajasthan
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अलवर शहरी विधानसभा के चुनावी दंगल में उतरे भाजपा के संजय शर्मा और कांग्रेस से श्वेता सैनी

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राजस्थान विधान सभा चुनावों का दौर शुरू हो चूका है। चुनावों के इस दौर में सभी पार्टियां चुनावी प्रचारो में जोरो से लगी हुए है  हाल ही में छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश और राजस्थान में चुनाव होने हैं। और ये चुनाव सभी पार्टिओ के लिए महत्वपूर्ण मने जा रहे हैं क्योकि कहीं न कहीं इन चुनावों में जीत या हार 2019 के राज्यसभा चुनावों में विभिन्न राजनैतिक पार्टिओ की छवि से जोड़ कर देखा जा रहा है।

वही बात राजस्थान में अलवर जिले की बात की जाए तो अलवर जिले में कुल 11 विधानसभा सीटें हैं और इन 11 सीटों के लिए विभिन्न पार्टिओ के उम्मीदवार मैदान में हैं, पिछले आंकड़ों को देखे तो पिछले विधानसभा चुनाव में इन 11 सीटों में से 9 सीटें अकेले बीजेपी ने जीती थी वही कांग्रेस को एक और एक सीट अन्य के खाते में गई थी।

इस बार ध्यान देने वाली बात यह है कि अलवर अरबन सीट से बीजेपी की तरफ से संजय शर्मा चुनावी मैदान में हैं वही कांग्रेस की तरफ से श्वेता सैनी। संजय शर्मा बीजेपी के एक विश्वशनीय नेता के तौर पर 25 सालों से भारतीय जनता पार्टी में हैं शर्मा भाजपा के प्रदेश मंत्री के साथ साथ जयपुर देहात के प्रभारी का कार्य भी संभल रहे थे।

वहीं बात कांग्रेस की करें तो पहले कांग्रेस की तरफ से कहा गया की जितेन्द्रे सिंह चुनाव लड़ेंगे फिर अजय अग्रवाल कोंग्रस में शामिल हुए तो उनके नाम की चर्चा हुई और इन तमाम उलझनों के बाद कांग्रेस ने श्वेता सैनी को अपना उम्मीदवार बनाया। इस बार कांग्रेस के लिए यह मुश्किल हो गया है कि वो अपने किस नेता का नाम सामने करें की पार्टी को अच्छा बहुमत मिले क्योकि संजय शर्मा बीजेपी की तरफ से एक कर्मठ और सुयोग्य उम्मीदवार माने जा हैं। कही न कही शर्मा की छवि पार्टी से लेकर जनता तक श्वेता सैनी से बेहतर बताई जा रही है और इस प्रकार अलवर शहरी क्षेत्र से बीजेपी और पार्टी  उम्मीदवार संजय शर्मा दोनों का पलड़ा कांग्रेस के मुकाबले भरी दिख रहा है। वही श्वेता सैनी के बारे में बात की जाए तो उनका रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है। पिछले नगरपालिका परिषद चुनावों में उनकी हार हुई थी तो हैरान करने वाली बात यह है कि इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें अपना उमीदवार बनाया है।

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